शक्ति स्वरूपा माँ जगदंबा : Shakti Swaroopa Maa Jagdamba

माँ सरस्वती की असीम कृपा से एक स्वरचित कविता
जिसका शीर्षक है – “शक्ति स्वरूपा माँ जगदंबा”

शक्ति स्वरूपा माँ जगदंबा बस इतना वर दे
मनोकामना पूरी कर दे ।।1।।

कांतिवान शोभा अति सुंदर भाल टीका शोभते
शंख चक्र गदा त्रिशूल धनुष खड़ग कर शोभते
सिंह बिरजती माता जन जन के कष्ट हरे
शक्ति स्वरूपा माँ जगदंबा बस इतना वर दे
मनोकामना पूरी कर दे ।।2।।

प्रचंड कालिका रूप तुम धारे,  रक्तबीज दानव सब मारे
परम शक्ति रूप धरी माता,  महिषाशुर राक्षस संहारे
अन्नापूर्णा रूप माँ जब धरही,  कोटि कोटि की तृष्णा हर लेही
जब माँ शिव वाम भाग बिराजे,  सकल सृष्टि भव सागर तारे
शक्ति स्वरूपा माँ जगदंबा बस इतना वर दे
मनोकामना पूरी कर दे ।।3।।

हे शैलपुत्री,  हे ब्रह्मचारिणी,  हे चंद्रघंटा नमो नम:
हे कुशमंदा,  हे स्कंदमाता,  हे कात्ययिनी नमो नम:
हे कालरात्रि,  हे महागौरी,  हे सिद्धिदात्री नमो नम:
नमो नमो नवदुर्गा मंगलकरनी बुद्धि, विवेक, ओज से भर दे
हे पापनाशनी भवतारिणी माता, उर का दानव हर ले
शक्ति स्वरूपा माँ जगदंबा बस इतना वर दे
मनोकामना पूरी कर दे ।।4।।

ॐ दुर्गायै नमः।।